दान पुण्य खोलता है मोक्ष के द्वार जानिए कैसे???

हिन्दू शास्त्रो में  कहते  है दान पुण्य करना बहुत फलदायी होता है  और जीवन में हमेशा हमसे जितना बन पड़े उतना दान पुण्य करते रहना चाहिए| और हिन्दू मान्यताओ की माने तो हमारे शास्त्रो में लिखा है  दान करने से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है अतः जैसे भी हो  दान करते रहना चाहिए चाहे वे भगवान के मंदिर में हो या किसी गरीब,अनाथ या निर्धन  को देना हो पर अपने कमाई का एक छोटा हिस्सा ही सही पर उसे दान में लगाना चाहिए इससे भगवान प्रसन्न होते है और हमारी आय में वृद्धि करते है|

पर दान करने के भी कुछ नियम होते है अगर  उन नियमो में रहकर दान  किया जाए तो बहुत फलदायी साबित होता है|

तो आईये जानते है क्या है ये नियम :-

1.गाय, घर, वस्त्र, शय्या तथा कन्या, इनका दान एक ही व्यक्ति को करना चाहिए।

2. दीन, अंधे, निर्धन, अनाथ, गूंगे, जड़, विकलांग तथा रोगी मनुष्य की सेवा के लिए जो धन दिया जाता है, उसका पुण्य महान होता है ।

3.देने वाला पूर्वाभिमुखी होकर दान दे, और लेने वाला उत्तराभिमुखी होकर उसे ग्रहण करें, ऐसा करने से दान देने वाले की आयु बढ़ती है, और लेने वाले की आयु भी क्षीण नहीं होती।

4.तिल, कुश, जल और चावल को हाथ में लेकर दान देना चाहिए अन्यथा उस दान पर दैत्य अधिकार कर लेते हैं।

5.जब गौ, ब्राम्हणों तथा रोगि‍यों को कुछ दिया जाता हो, उस समय यदि कोई व्यक्ति उसे न देने की सलाह देता हो, तो वह दुःख भोगता है।

6.अन्न, जल, घोड़ा, गाय, वस्त्र, शय्या, छत्र और आसन, इन आठ वस्तुओं का दान मृत्योपरांत के कष्टों को नष्ट करता है।

7.जो मनुष्य अपनी स्त्री, पुत्र एवं परिवार को दुःखी करके दान देता है, वह दान जीवित रहते हुए भी एवं मरने के बाद भी दुःखदायी होता है।

8.स्वयं जाकर दिया हुआ दान उत्तम एवं घर बुलाकर दिया हुआ दान मध्यम फलदायी होता है।

9.गाय, स्वर्ण, चांदी, रत्न, विद्या, तिल, कन्या, हाथी, घोड़ा, शय्या, वस्त्र, भूमि, अन्न, दूध, छत्र तथा आवश्यक सामग्री सहित घर, इन 16 वस्तुओं के दान को महादान कहते हैं।

10.रोगी की सेवा करना, देवताओं का पूजन और ब्राह्मणों के पैर धोना, गौ दान के समान है।

तो इन नियमो में रहकर दान करे और बहुत फल पाये|

 

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